आज दुःखी सा मन
मानो बेकार हो तन
जीने की इच्छा का हो अंत
और परेशानियां हों अनंत
क्या कुछ ऐसा करें ?
हिम्मत हम में फिर से आए
मन ख़ुशी से फिर भर जाए
मानो फिर से नया जीवन पाएँ
याद तुम उसे करना
प्रेम तुम्हे जिससे अधिक
ख़ुशी हो जिससे अधिक
जिससे भटका रही फिर बने पथिक
दुनिया की खूबसूरती को तुम देखना
सारे दुखों को परे फेंकना
जिंदगी की महत्ता को याद करना
ऐसा जीवन खोने से डरना
आखिर क्यों है जीने से भला मरना ?
सन्देश : इस कविता के द्वारा यह कहा गया है की इंसान के जीवन में कई बार समय ऐसा होता है कि उसे जीने से भला मरना लगने लगता है -आखिर ऐसा क्यों ? और कई बार कुछ इंसान गलत कदम भी उठा देते हैं , दुखों से मुकाबला करने का साहस रखो,खुशियां अपनेआप आपके दरवाज़े कभी न कभी स्वयं आएंगी। जीवन में दुःख ना हो तो जीवन में ख़ुशी का एहसास कैसे होगा ? यह बात सोचने वाली है लेकिन यह भी साफ़ है की जब कभी मनुष्य के जीवन में दुखों का बोलबाला अधिक रहने लगता है तो मनुष्य को कोई भी अन्य चीज़ अच्छा लगना बंद सा हो जाता है। कविता के माध्यम से यह बताना चाहा है की ऐसे वक़्त में हमे उसे याद करना चाहिए जो हमारे लिए सबसे महत्त्वपूर्ण हो (कोई भी ) और साथ ही उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जिन्हे हमारे होने ,न होने से फर्क पड़ता हो। हमे दुनिया की खूबसूरती को देखना चाहिए , जीवन की महत्ता को समझना चाहिए और साथ ही जीने की उम्मीद बढ़ानी चाहिए। जीवन से भड़कर मृत्यु नहीं,साहस से बढ़कर दुःख नहीं।
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