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Sunday, 17 November 2019

Shayari

Najar ghuma kar dkha har taraf
Door tak koi sath na dkha
Reh gye apni ladai me akele hum
Aansuyon ko ponchkr yun humne fir chlna shuru kia....(2)

Monday, 11 November 2019

Jeevan

आज दुःखी सा मन
मानो बेकार हो तन 
जीने की इच्छा का हो अंत 
और परेशानियां हों अनंत 

क्या कुछ ऐसा करें ?
हिम्मत हम में  फिर से आए 
मन ख़ुशी से फिर भर जाए 
मानो फिर से नया जीवन पाएँ   

याद तुम उसे करना 
प्रेम तुम्हे जिससे अधिक 
ख़ुशी हो जिससे अधिक 
जिससे भटका रही फिर बने पथिक 

दुनिया की खूबसूरती को तुम देखना 
सारे दुखों को परे फेंकना 
जिंदगी की महत्ता को याद करना 
ऐसा जीवन खोने से डरना 
आखिर क्यों है जीने से भला मरना ?

सन्देश : इस कविता के द्वारा यह कहा गया है की इंसान के जीवन में कई बार समय ऐसा होता है कि उसे जीने से भला मरना लगने लगता है -आखिर ऐसा क्यों ? और कई बार कुछ इंसान गलत कदम भी उठा देते हैं , दुखों से मुकाबला करने का साहस रखो,खुशियां अपनेआप आपके दरवाज़े कभी न कभी स्वयं आएंगी। जीवन में दुःख ना हो तो जीवन में ख़ुशी का एहसास कैसे होगा ? यह बात सोचने वाली है लेकिन यह भी साफ़ है की जब कभी मनुष्य के जीवन में दुखों का बोलबाला अधिक रहने लगता है तो मनुष्य को कोई भी अन्य चीज़ अच्छा लगना बंद सा हो जाता है। कविता के माध्यम से यह बताना चाहा है की ऐसे वक़्त में हमे उसे याद करना चाहिए जो हमारे लिए सबसे महत्त्वपूर्ण हो (कोई भी ) और साथ ही उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जिन्हे हमारे होने ,न होने से फर्क पड़ता हो। हमे दुनिया की खूबसूरती को देखना चाहिए , जीवन की महत्ता को समझना चाहिए और साथ ही जीने की उम्मीद बढ़ानी चाहिए। जीवन से भड़कर मृत्यु नहीं,साहस से बढ़कर दुःख नहीं। 

Monday, 4 November 2019

Mehnat ya kismat?

एक नया पाठ पढ़े चलें 
किस्मत के झूठ से परे चलें

मेहनत करो तुम जी जान से 
क्या क़िस्से सुने बिना मेहनत किसी महान से ?

कोसते तुम किस्मत को रहोगे 
किस्मत तुम खुद ही लिखोगे 

दुखों का पिटारा तो हर किसी के पास है 
क्या मंजिल तक पहुँचने का तुम्हारे मन में विश्वास है ?

प्रश्न तुम स्वयं से करोगे 
जवाब तुम्हारे पास होंगे 

people standing on a mountain image
मेहनत का फल 
दूसरों से प्रश्न करके 
घूमते मन के चरखे 

किस्मत का हिसाब जानते तुम 
जिनके हाथ नहीं उनको क्या बदकिस्मत मानते तुम ?

हौसला दिल में होना चाहिए 
हाथों की लकीरों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए 

लकीरों का रुख रोज़ बदलता है 
जो मेहनत करे ,वही आगे निकलता है 

नया पाठ पढ़े चले 
किस्मत के झूठ से परे चलें 


सन्देश : इस कविता के माध्यम से मेहनत करने वालों की जीत बताई गयी है तथा साथ ही यह भी बताया गया है की हमे किस्मत के भरोसे नहीं बैठना चाहिए क्योंकि किस्मत के भरोसे आपको भले ही कुछ अच्छा कभी न कभी अपने  जीवन में प्राप्त हुआ हो परन्तु असल में  जीवन की सफलता  पाने का एकमात्र रास्ता है -मेहनत, भले ही उसमे समय थोड़ा ज्यादा लग जाए किन्तु उसे यह समझकर पार करना की जब कठिन वक़्त हो तो वह आपकी एक कड़ी परीक्षा है और आपको उसे पार करना है। कुछ लोगों को बिना मेहनत के कई बार सफलता मिल जाती है अथवा कुछ लोगों को बहुत मेहनत करने के बाद भी नहीं किन्तु याद रहे मेहनत करने वाले व्यक्ति में जीवन की हर परिस्थिति का सामना करने की छमता होगी और साथ ही ज्ञान,मनोबल ,हार का एहसास जिससे जीवन की परीक्षा में वो कभी हारेगा नहीं जबकि जिस व्यक्ति को किस्मत के भरोसे कुछ मिलता रहे उसका ज्ञान, सहनशीलता आदि का अभाव रहेगा आखिर मेहनत का फल मीठा होता है।