एक नया पाठ पढ़े चलें
किस्मत के झूठ से परे चलें
मेहनत करो तुम जी जान से
क्या क़िस्से सुने बिना मेहनत किसी महान से ?
कोसते तुम किस्मत को रहोगे
किस्मत तुम खुद ही लिखोगे
दुखों का पिटारा तो हर किसी के पास है
क्या मंजिल तक पहुँचने का तुम्हारे मन में विश्वास है ?
प्रश्न तुम स्वयं से करोगे
जवाब तुम्हारे पास होंगे
दूसरों से प्रश्न करके
घूमते मन के चरखे
किस्मत का हिसाब जानते तुम
जिनके हाथ नहीं उनको क्या बदकिस्मत मानते तुम ?
हौसला दिल में होना चाहिए
हाथों की लकीरों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए
लकीरों का रुख रोज़ बदलता है
जो मेहनत करे ,वही आगे निकलता है
नया पाठ पढ़े चले
किस्मत के झूठ से परे चलें
सन्देश : इस कविता के माध्यम से मेहनत करने वालों की जीत बताई गयी है तथा साथ ही यह भी बताया गया है की हमे किस्मत के भरोसे नहीं बैठना चाहिए क्योंकि किस्मत के भरोसे आपको भले ही कुछ अच्छा कभी न कभी अपने जीवन में प्राप्त हुआ हो परन्तु असल में जीवन की सफलता पाने का एकमात्र रास्ता है -मेहनत, भले ही उसमे समय थोड़ा ज्यादा लग जाए किन्तु उसे यह समझकर पार करना की जब कठिन वक़्त हो तो वह आपकी एक कड़ी परीक्षा है और आपको उसे पार करना है। कुछ लोगों को बिना मेहनत के कई बार सफलता मिल जाती है अथवा कुछ लोगों को बहुत मेहनत करने के बाद भी नहीं किन्तु याद रहे मेहनत करने वाले व्यक्ति में जीवन की हर परिस्थिति का सामना करने की छमता होगी और साथ ही ज्ञान,मनोबल ,हार का एहसास जिससे जीवन की परीक्षा में वो कभी हारेगा नहीं जबकि जिस व्यक्ति को किस्मत के भरोसे कुछ मिलता रहे उसका ज्ञान, सहनशीलता आदि का अभाव रहेगा आखिर मेहनत का फल मीठा होता है।