नाजाने क्या हुआ है , दर्द सा हुआ है
जिंदगी के इस पड़ाव में ,लड़खड़ाने लगे हैं पाँव
घुटन भरी महफ़िल से ढूंढ़ने निकले हैं छाँव
तवज्जो दी जिन्हे खुदा की तरह बेशुमार
आज वही खेलने लगे हैं हमारी ख़ुशी के दांव
न जाने क्या हुआ है , दर्द सा हुआ है
छालों पर नजर न पड़ी हमारी
चेहरे पर अक्सर हंसी रहती थी हमारी
आज न जाने समां बदला है या नजाने हम
बातों ही बातों में आज छालों पर दर्द होने लगा है
न जाने क्या हुआ है , दर्द सा हुआ है
बोल दे दिल खोल कर अगर किसी से
उस दौर को हमने भी पार किया है
सोचा करते थे जो बिना दर्दों के जीवन हमारा
परदे के पीछे से दरवाज़ा हमने ही बंद किया है
न जाने क्या हुआ है , दर्द सा हुआ है
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| भरोसा एक साथ |
सन्देश : कविता के द्वारा एक छोटा सा किन्तु एक महत्त्वपूर्ण सन्देश सभी युवा पीढ़ी को यह है की समाज में आप कैसे भी अपने जीवन को जिएं किन्तु किसी न किसी को आपके व्यवहार पर प्रश्न होते है तथा साथ ही जरूरत से ज्यादा किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करना आपके दुःख एवं नुक़सान का कारण भी बन सकता है,इसीलिए आप अपने जीवन में सही लोगों का चुनाव करें तथा यदि आपको किसी से हानि होने के संकेत मिल रहे हैं तो आप अपने जीवन का दरवाजा उन लोगों के लिए समय रहते बंद कर दें और जीवन के एक कड़वे सच से हमेशा परिचित रहिये की यदि आप ख़ुश हैं तो सब आपसे बात करने में रुचि रखेंगे और यदि आप दुखी हैं तो स्वयं को आपसे दूर रखने की कोशिश करेंगे। इसलिए आप अपना व्यवहार कुछ ऐसा बनाएं की सब आपके संपर्क में रहना चाहें और आप उन लोगों का चुनाव करे जो आपके सुख दुःख में आपके साथ हमेशा बने रहे।
इस कविता के द्वारा उन लोगों पर चर्चा नहीं की गयी है जो स्वयं दूसरों को हानि पहुँचाने के पश्चात सही लोगों के साथ की अपेक्षा करते हैं । उन लोगों के लिए सर्वप्रथम यही सन्देश है की पहले अपने जीवन में बदलाव करें तथा उसके बाद मे दूसरों से उम्मीद करें।

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