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Thursday, 31 October 2019

kuch kar Dikhao


समझ गए आज उन लोगों की मजबूरी 
गलत रास्तों पर चले जो दुःख में 
अक्सर सोचा करते थे बैठे हम 
ऐसी भी क्या थी उनकी मजबूरी 
परिस्थिति ने उन्हें गलत सिखा दिया 
सही वो सीख पाए ना क्योंकि  
चलना चाहा उन्होंने भी सही रास्ते पर 
तरीका न था उन पर  कोई 
क्योंकि बचपन में ही थी शिक्षा खोयी  
ज्ञान का सागर तो हर तरफ फैला है 
लेकिन जिसने है जिंदगी खोखली पाई 
वो भी क्या सीखेगा भाई 
समझने में अभी भी शायद चूक हो 
पर गलत मैं पूरी नहीं 
खुद की मजबूरी में सोचना उनका 
जिन्होंने हैं अपनी खुशियाँ खोई   
कर दिखाओ कुछ ऐसा कि रास्ते भी खुल जाए उनके 
मजबूरी में होकर भी गलत न रास्ते हो उनके 
वे भी बने उदाहरण कुछ कर  दिखाओ ऐसा कोई 
वरना ऐसा ही चलता रहेगा भाई। 

सन्देश : इस कविता के द्वारा यह सन्देश दिया जाता है की समाज में होने वाले बहुत से गलत कर्मो के कारण  कुछ ऐसे है जिससे शायद वे कुछ अच्छा करने में स्वयं को समर्थ नहीं पाते हैं। गरीबी और परिवार की मानसिकता व साथ ही अन्य कई कारणों से वह पढ़ नहीं पाते तथा उनमे साथ ही आत्मबल की कमी होती होगी किन्तु इसका मतलब ये नहीं की गलत रास्तों पर चलकर ही आप अपना जीवन निर्वाह करते हैं , ऐसे कई रोजगार हैं जिनसे आप समाज में कुछ अच्छा कर सकते हैं। यह सभी बातें हर किसी व्यक्ति को पता होंगी किन्तु क्या कोई इसके लिए स्वयं अकेला  कुछ कर सकता है ? जवाब है- जी हाँ बिलकुल। ऐसे व्यक्ति अधिकतर बचपन से ही  गलत दिशा की ओर चले जाते हैं और साथ ही यह  भी सच है की बचपन में सिखाई गयी बातें सबसे ज्यादा याद रहती है और ज्यादातर व्यक्ति जिंदगी भर उन्ही बातों पर चलते  हैं , हमारे पढ़े लिखे होने के  नाते हमारा यह  कर्त्तव्य बनता है की हम उन लोगों तक अपनी बात पहुचांए ,सरकार की नीतियों तथा उन्हें नए अवसरों क बारे में अवगत कराएं तथा उन्हें भी समाज का एक बेहतरीन उदाहरण बनाने में अपना योगदान दें । 

यह कविता केवल और केवल उन लोगों को केंद्र में लेकर बनाई गई है जिनके पास अच्छी शिक्षा एवं उज्जवल अवसरों का ज्ञान नहीं  है।  



Najane ky hua hai ......

 नाजाने क्या हुआ है , दर्द सा हुआ है 
जिंदगी के इस पड़ाव में ,लड़खड़ाने लगे हैं पाँव 
घुटन भरी महफ़िल से ढूंढ़ने निकले हैं छाँव  
तवज्जो दी जिन्हे खुदा की तरह बेशुमार 
आज वही खेलने लगे हैं हमारी ख़ुशी के दांव 
न जाने क्या हुआ है , दर्द सा हुआ है 

छालों पर नजर न  पड़ी हमारी 
चेहरे पर अक्सर हंसी रहती थी  हमारी 
आज न जाने समां बदला है या नजाने हम 
बातों ही बातों में आज छालों पर दर्द होने लगा है 
न जाने क्या हुआ है , दर्द सा हुआ है 

बोल दे दिल खोल कर अगर किसी से 
उस दौर को हमने भी पार किया है 
सोचा करते थे जो बिना दर्दों  के जीवन हमारा 
परदे के पीछे से दरवाज़ा हमने ही बंद किया है 
न जाने क्या हुआ है , दर्द सा हुआ है 

भरोसा एक साथ 


सन्देश :  कविता के द्वारा एक छोटा सा किन्तु एक महत्त्वपूर्ण सन्देश सभी युवा पीढ़ी को यह है की समाज में आप कैसे भी अपने जीवन को जिएं किन्तु किसी न किसी को आपके व्यवहार पर प्रश्न होते है तथा साथ ही जरूरत से ज्यादा किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करना आपके दुःख एवं नुक़सान का कारण भी बन सकता है,इसीलिए आप अपने जीवन में सही लोगों का चुनाव करें तथा यदि आपको किसी से हानि होने के संकेत मिल रहे हैं तो आप अपने जीवन का दरवाजा उन लोगों के लिए समय रहते बंद कर दें और जीवन के एक कड़वे सच से हमेशा परिचित रहिये की यदि आप ख़ुश हैं तो सब आपसे बात करने में रुचि रखेंगे और यदि आप दुखी हैं तो स्वयं को आपसे दूर रखने की कोशिश करेंगे। इसलिए आप अपना व्यवहार कुछ ऐसा बनाएं  की सब आपके संपर्क में रहना चाहें और आप उन लोगों का चुनाव करे जो आपके सुख दुःख में आपके साथ हमेशा बने रहे।  

इस कविता के द्वारा उन लोगों पर चर्चा नहीं की गयी है जो स्वयं दूसरों को हानि पहुँचाने के पश्चात सही लोगों के साथ की अपेक्षा करते हैं । उन लोगों के  लिए सर्वप्रथम यही सन्देश है की पहले अपने जीवन में बदलाव करें तथा उसके बाद मे दूसरों से उम्मीद करें।   

Monday, 28 October 2019

kuch to wajah rahi hogi

                                                
 जन्म लेने से लेकर जिसने है गर्भ में कई बातें सुनी 
 घर में प्यार न मिलने पर जिसने है कई वजह सुनी ,
 ख़ुशी से स्वागत तो वो भी चाहती थी 
 पर इन सबके पूरा  न होने की कुछ तो वजह रही होगी।
                                                                      
 दिल तो उसका भी होगा , प्यार तो उसको भी चाहिए होगा 
 खुशियाँ  तो उसकी भी होंगी 
 पर इन सबके पूरा न होने की कुछ तो वजह रही होगी।  

 पढ़ना लिखना तो उसने भी चाहा होगा 
 किसी को अपना हुनर दिखाना उसने भी चाहा होगा ,
 मान तो वो भी बढ़ाना चाहती थी 
 पर इन सबके पूरा न होने की कुछ तो वजह रही होगी। 

 मर्ज़ी तो उसकी भी रही होगी 
 फूलों  की तरह हंसी उसकी भी रही होगी 
 बेटे का मुकाबला करने की हिम्मत उसमे भी रही होगी 
 पर इन सबके पूरा न  होने की कुछ तो वजह रही होगी।

 लड़ने झगड़ने का अधिकार तो उसका भी रहा होगा 
 क्या कोई उसका अपना भी रहा होगा ?
 जीने का अधिकार तो वो भी चाहती थी 
 पर इन सबके पूरा न होने की कुछ तो वजह रही होगी। 


सन्देश  :  इस कविता की ओर से  यह सन्देश देने की इच्छा है की समाज में लिंग के आधार पे यह भेदभाव कर दिया जाता है जिससे  समाज में अनेक अपराध उत्पन्न हो जाते है , एक बेटी और बहु को भी उतना ही अधिकार दिया जाना चाहिए जितना एक बेटे को। हालाँकि आज समाज के  इस व्यवहार में बहुत बदलाव आया  है लेकिन कहीं न कहीं आज भी बहुत सी जगह बेटियों को पूर्ण रूप से बराबरी का दर्जा नहीं दिया जाता तथा साथ ही  उन्हें अनेक प्रकार से जुर्म दिए जाते है। उन्हें लड़कों से कम आँका जाता है तथा  पढ़ने लिखने  तक का अधिकार नहीं है। इस कविता के माध्यम से सभी लोगों  से गुजारिश है की समाज की इस विषय में सोच परिवर्तन में अपना योगदान अपने आप से ही देना शुरू करे तथा  जहाँ भी गलत होता दिखाई दे वहां आवाज जरूर उठाइये। 








Tuesday, 22 October 2019

Soch Parivartan

मनुष्य  भिन्न  , कला  भिन्न  
व्यक्तित्व  भिन्न  , सपने  भिन्न 

आदर्श  बना चले है अपने अपने 
हकीकत बना चले सपने अपने ?

हाथ थामे चले है जिनकी 
सोच में परिवर्तन होगा उनकी ?

दोष न उनका स्वयं अकेला
समाज ने है उन्हें धकेला 

स्वयं जुड़कर समाज कहलाया , 
किन्तु स्वयं के कारण कोई परिवर्तन लाया ? 

शिक्षा  मानसिक विकास का साधन
विद्या व्यक्तित्व का साधन ,
जरूरी यही सपने साकार करने का साधन ?

सपने चुनो कुछ ऐसे अपने 
गर्व हो जिन्हे देखकर अपने ,
                                  
परिवार में  बसी दुनिया  , दुनिया में  बसा परिवार 
 क्यों स्वयं करे सपनों पर वार ?

शिक्षा दरवाजे की चाबी 
सपने मंज़िल की साथी ,
करो साकार सपने अपने 
ताकि लोग कहें  क्या खूब थे अपने !


कविता  का  तात्पर्य : इस  कविता  के  माध्यम  से  समाज  का  ध्यान  इस  ओर  केंद्रित  किया गया  है  की  हमें  अपनों  सपनो  का  चयन  स्वयं  करना  चाहिए  तथा  समाज  हम  लोगों  से  मिलकर  ही  बनता  है  इसलिए  समाज क्या कहेगा यह सोचकर  अपने  और अपने  परिवारजनों का भविष्य  उनकी इच्छा के विरुद्ध  बनाने  में साथ  न  दे , यदि  आज आपने  उनका  साथ  दे  दिया  तो  कल  वे  कुछ  ऐसा  कर  जाएंगे  जिससे  वही  समाज अब  उनकी  तारीफें करेगा  तथा आपके  समर्थन  पर अपनी  मानसिकता में  बदलाव । मानसिकता में  बदलाव  की आज भी  काफी जरूरत  है  जो  एक-एक  सोच से बदलाव करेगी।