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Monday, 28 October 2019

kuch to wajah rahi hogi

                                                
 जन्म लेने से लेकर जिसने है गर्भ में कई बातें सुनी 
 घर में प्यार न मिलने पर जिसने है कई वजह सुनी ,
 ख़ुशी से स्वागत तो वो भी चाहती थी 
 पर इन सबके पूरा  न होने की कुछ तो वजह रही होगी।
                                                                      
 दिल तो उसका भी होगा , प्यार तो उसको भी चाहिए होगा 
 खुशियाँ  तो उसकी भी होंगी 
 पर इन सबके पूरा न होने की कुछ तो वजह रही होगी।  

 पढ़ना लिखना तो उसने भी चाहा होगा 
 किसी को अपना हुनर दिखाना उसने भी चाहा होगा ,
 मान तो वो भी बढ़ाना चाहती थी 
 पर इन सबके पूरा न होने की कुछ तो वजह रही होगी। 

 मर्ज़ी तो उसकी भी रही होगी 
 फूलों  की तरह हंसी उसकी भी रही होगी 
 बेटे का मुकाबला करने की हिम्मत उसमे भी रही होगी 
 पर इन सबके पूरा न  होने की कुछ तो वजह रही होगी।

 लड़ने झगड़ने का अधिकार तो उसका भी रहा होगा 
 क्या कोई उसका अपना भी रहा होगा ?
 जीने का अधिकार तो वो भी चाहती थी 
 पर इन सबके पूरा न होने की कुछ तो वजह रही होगी। 


सन्देश  :  इस कविता की ओर से  यह सन्देश देने की इच्छा है की समाज में लिंग के आधार पे यह भेदभाव कर दिया जाता है जिससे  समाज में अनेक अपराध उत्पन्न हो जाते है , एक बेटी और बहु को भी उतना ही अधिकार दिया जाना चाहिए जितना एक बेटे को। हालाँकि आज समाज के  इस व्यवहार में बहुत बदलाव आया  है लेकिन कहीं न कहीं आज भी बहुत सी जगह बेटियों को पूर्ण रूप से बराबरी का दर्जा नहीं दिया जाता तथा साथ ही  उन्हें अनेक प्रकार से जुर्म दिए जाते है। उन्हें लड़कों से कम आँका जाता है तथा  पढ़ने लिखने  तक का अधिकार नहीं है। इस कविता के माध्यम से सभी लोगों  से गुजारिश है की समाज की इस विषय में सोच परिवर्तन में अपना योगदान अपने आप से ही देना शुरू करे तथा  जहाँ भी गलत होता दिखाई दे वहां आवाज जरूर उठाइये। 








2 comments:

  1. Great work������
    Best wishes for you upcoming poems������

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