समझ गए आज उन लोगों की मजबूरी
गलत रास्तों पर चले जो दुःख में
अक्सर सोचा करते थे बैठे हम
ऐसी भी क्या थी उनकी मजबूरी
परिस्थिति ने उन्हें गलत सिखा दिया
सही वो सीख पाए ना क्योंकि
चलना चाहा उन्होंने भी सही रास्ते पर
तरीका न था उन पर कोई
क्योंकि बचपन में ही थी शिक्षा खोयी
ज्ञान का सागर तो हर तरफ फैला है
लेकिन जिसने है जिंदगी खोखली पाई
वो भी क्या सीखेगा भाई
समझने में अभी भी शायद चूक हो
पर गलत मैं पूरी नहीं
खुद की मजबूरी में सोचना उनका
जिन्होंने हैं अपनी खुशियाँ खोई
कर दिखाओ कुछ ऐसा कि रास्ते भी खुल जाए उनके
मजबूरी में होकर भी गलत न रास्ते हो उनके
वे भी बने उदाहरण कुछ कर दिखाओ ऐसा कोई
वरना ऐसा ही चलता रहेगा भाई।
सन्देश : इस कविता के द्वारा यह सन्देश दिया जाता है की समाज में होने वाले बहुत से गलत कर्मो के कारण कुछ ऐसे है जिससे शायद वे कुछ अच्छा करने में स्वयं को समर्थ नहीं पाते हैं। गरीबी और परिवार की मानसिकता व साथ ही अन्य कई कारणों से वह पढ़ नहीं पाते तथा उनमे साथ ही आत्मबल की कमी होती होगी किन्तु इसका मतलब ये नहीं की गलत रास्तों पर चलकर ही आप अपना जीवन निर्वाह करते हैं , ऐसे कई रोजगार हैं जिनसे आप समाज में कुछ अच्छा कर सकते हैं। यह सभी बातें हर किसी व्यक्ति को पता होंगी किन्तु क्या कोई इसके लिए स्वयं अकेला कुछ कर सकता है ? जवाब है- जी हाँ बिलकुल। ऐसे व्यक्ति अधिकतर बचपन से ही गलत दिशा की ओर चले जाते हैं और साथ ही यह भी सच है की बचपन में सिखाई गयी बातें सबसे ज्यादा याद रहती है और ज्यादातर व्यक्ति जिंदगी भर उन्ही बातों पर चलते हैं , हमारे पढ़े लिखे होने के नाते हमारा यह कर्त्तव्य बनता है की हम उन लोगों तक अपनी बात पहुचांए ,सरकार की नीतियों तथा उन्हें नए अवसरों क बारे में अवगत कराएं तथा उन्हें भी समाज का एक बेहतरीन उदाहरण बनाने में अपना योगदान दें ।
यह कविता केवल और केवल उन लोगों को केंद्र में लेकर बनाई गई है जिनके पास अच्छी शिक्षा एवं उज्जवल अवसरों का ज्ञान नहीं है।

Very true and realistic approach. Well-done.
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